गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है

जैसा कि गणेश चतुर्थी हमारे त्योहारों में से एक है और यह मुंबई शहर में खासकर बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है तो आप जानते ही होंगे किया क्यों मनाया जाता है इसके पीछे कौन सी कहानी छिपी हुई है अगर आप नहीं जानते हैं तो चलिए आपको बताते हैं

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हमारे पुराणों के अनुसार गणेश जी का जन्म इसी तिथि को हुआ था जिसकी वजह से गणेश चतुर्थी मनाया जाता है या हिंदुओं के प्रमुख त्यौहार में से एक त्यौहार माने जाते हैं गणेश चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की छोटे से लेकर बड़े मूर्तियां स्थापित की जाती है और इसे 9 दिन तक बहुत ही धूमधाम के साथ रखा जाता है और पूजा किया जाता है बड़ी संख्या में लोग आसपास से आते हैं भगवान श्री गणेश का दर्शन करने फिर 9 दिन बाद गाजे-बाजे के साथ श्री गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है

1. गणेश चतुर्थी की कहानी

एक बार की बात है सभी देवी देवताओं ने किसी बात को लेकर बहुत ही मुश्किल में थे तो उन्होंने राय विचार करके भगवान श्री शंकर के पास आए जब वहां आए तो वहां पर गणेश जी और कार्तिकेय जी अपने मम्मी के पापा के पास ही बैठे थे सभी देवी देवताओं ने अपने समस्या का हाल शंकर जी से पूछा तो शंकर जी ने अपने दौड़ने बेटे श्री गणेश जी और श्री कार्तिकेय जी से पूछा की-
वह बोले कि तुम दोनों में से कौन इन लोगों का समस्या हल करेगा तो वह दोनों भाई ही तैयार हो गया लेकिन इस पर भगवान शंकर जी ने एक प्रतियोगिता रखें उन्होंने कहा कि आप दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी का भ्रमण करके आएगा वही इन देवताओं का समस्या का हल करेंगे, यह बात सुनकर दोनों भाई मान गए,

यह सब बात सुनते ही कार्तिकेय जी अपनी सवारी मोर पर बैठकर तुरंत पृथ्वी का भ्रमण करने चले गए जबकि गणेश जी के पास तो चूहा की सवारी थी तो वह सोचने लगे कि मैं क्या करूं फिर कुछ देर सोचने के बाद वह चूहे पर बैठकर अपने माता पिता शंकर पर्वती के पास गए और उनके सात चक्कर लगाकर फिर वह अपने स्थान पर आकर बैठ गए
यह सारे दृश्य सभी देवी देवताओं देख रहे थे फिर कुछ समय बाद कार्तिकेय जी पृथ्वी का परिक्रमा करने के बाद खुश होते हुए आए और अपनी विजय की घोषणा करते हुए खुशी मना रहे थे तभी शंकर जी ने गणेश जी से पूछा की गणेश तूने क्यों नहीं पृथ्वी की परिक्रमा की तब गणेश जी ने उत्तर देते हुए कहा कि - " माता-पिता में ही तो मेरा सारा संसार बसा हुआ है"
तुम्हें किसकी परिक्रमा करने जाऊं मेरा संसार तो यहीं पर हैं
चाहेंगे पृथ्वी की परिक्रमा करो या माता-पिता की दोनों बराबर ही है यह बात सुनकर भगवान शंकर ने उनको विजय घोषित कर दिया और सभी देवी देवताओं को समस्याओं को हल करने को भी आज्ञा दे दिया

"साथ ही शिवजी नें गणेश जी को यह भी आशीर्वाद दिया कि कृष्ण पक्ष के चतुर्थी में जो भी व्यक्ति तुम्हारी पूजा और व्रत करेगा उसके सभी दुःख दूर होंगे और भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी।"

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं कि यह कहानी आपको अच्छी लगी हुई होगी ऐसे ही व्रत त्योहारों के बारे में जानने के लिए वेबसाइट को विजिट करते रहें


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